भारत की एक ऐसी जेल, जहां ऐश में कट रही है कैदियों की जिंदगी

महाराष्ट्र के एक जेल की तस्वीर इस धारणा से बिलकुल उलट है. यहां के कैदी अपनी जिंदगी ऐश में गुजारते हैं. सुनने में ये बात भले ही थोड़ी अटपटी लग रही हो, लेकिन इस जेल की यही सच्चाई है.

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swatantrapuram open colony

जेल के बारे में हमेशा से ही हमारी ये धारणा रही है कि यहां कैदियों से कीड़े मकोड़ों के समान बर्ताव किया जाता है. इस शब्द का नाम जुबां पर आते ही मन में एक ऐसे माहौल की तस्वीर उभरने लगती है जिसमें इंसान छोटी और तंग जगह में ठुंसा पड़ा हो. न ही ठीक से सोने का इंतजाम हो और न ही खाने पीने की आजादी हो. कुल मिलाकर जिंदगी नर्क की मानिंद हो. लेकिन महाराष्ट्र के एक जेल की तस्वीर इस धारणा से बिलकुल उलट है. यहां के कैदी अपनी जिंदगी ऐश में गुजारते हैं. सुनने में ये बात भले ही थोड़ी अटपटी लग रही हो, लेकिन इस जेल की यही सच्चाई है. आइये विस्तार से जानें महाराष्ट्र की इस जेल में आखिर क्यूं खुशहाली से कट रहा है कैदियों का जीवन.

परिवारों के साथ जीवन व्यतीत करते हैं कैदी

हम बात कर रहे हैं महाराष्ट्र के सांगली जिले के अंतर्गत आने वाली स्वतंत्रपुर ओपन कॉलोनी की जेल किसी पारंपरिक जेल की तर्ज पर नहीं है. यहां न ही कटीले तारों की ऊंची दीवारें है जिनके जरिये सुरक्षा घेरा नहीं बनाया जाता है. न ही कोई दरवाजे हैं, न ही सुरक्षाबलों की चौकियां स्थापित हैं. यहां कैदी अपने परिवारों के साथ जीवन व्यतीत करते हैं. और तो और यहां जेल के खेत भी हैं जिनमें वो सब्जियां उगाते हैं, दिहाड़ी कमाते हैं और उन्ही सब्जियों को नजदीकी बाज़ार में बेच देते हैं.

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कहीं भी जाने के लिए स्वतंत्र हैं कैदी

इन कैदियों को कहीं भी जाने की आजादी है, बशर्ते उन्हें शाम 7 बजे रोल कॉल के वक़्त परिसर में मौजूद रहना पड़ता है. गौरतलब है कि ये कॉलोनी 1937 में स्थापित की गई थी जिसका उद्देश्य जेल और अपराध की भावना को बदलना था. इस जेल की इतनी चर्चाएं हैं कि यहां वी शांताराम की फिल्म ‘दो आंखें बारह हाथ’ (1957) के कई सीन शूट किये गए थे.

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61 एकड़ तक फैली है ये जेल

इस जेल में बाकी अन्य कारागारों की तरह हमेशा कैदी जेल यूनिफार्म में नहीं रहते. वे सिर्फ ख़ास मौकों जैसे स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस पर ही ये यूनिफार्म पहनते हैं. शुरुआत से लेकर आज की तारीख में ये जेल 63 एकड़ तक फ़ैल चुकी है. यहां 2019 में एक नई विंग स्थापित की गई थी. इस कॉलोनियों के विभिन्न हिस्सों में दीवारों का रंगरोगन किया गया है. फर्शों पर टाइल्स लगे हैं और किचन की भी व्यवस्था है. भीषण बारिश के चलते पिछले साल कॉलोनी की हालत जर्जर हो गई थी जिसके बाद इसकी फिर से मरम्मत की गई है. बता दें कि कैदियों का दूसरी जेलों में अच्छा आचरण देखकर उन्हें यहां शिफ्ट कर दिया जाता है.

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