अब क्रिमिनल रिकॉर्ड वाले नेताओं का चुनाव लड़ना होगा मुश्किल, सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया बड़ा फैसला

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गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने राजनीति में बढ़ रही आपराधिक छवि से जुड़ी एक अहम याचिका पर सुनवाई की. कोर्ट ने इस मामले में एक बड़ा आदेश देते हुए कहा कि अब पार्टियों को अपने दागी उम्मीदवारों के बारे में जानकारी चुनाव आयोग को देनी होगी. कोर्ट के फैसले के मुताबिक पार्टियों को ये बताना होगा कि उन्होनें दागी उम्मीदवारों को चुनाव का टिकट क्यों दिया?

देनी होगी क्रिमिनल रिकॉर्ड से जुड़ी जानकारी

जस्टिस रोहिंटन नरीमन और एस रविंद्र भट की बेंच वाली पीठ ने कहा कि सभी राजनीतिक पार्टियों को अपनी वेबसाइट पर चुनाव की टिकट दिए जाने वाले सभी उम्मीदवारों के आपराधिक रिकॉर्ड से जुड़ी सारी जानकारी देनी होगी. जिसमें उस उम्मीदवार पर दर्ज सारे आपराधिक केस, ट्रायल और प्रत्याशी को टिकट दिए जाने की वजह बतानी होगी. सुप्रीम कोर्ट ने साथ में ये भी कहा कि जिसने इसका पालन नहीं किया उस पर अवमानना के तहत कार्रवाई भी की जा सकती हैं.

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सुप्रीम कोर्ट के फैसले के मुताबिक पार्टियों को चुनाव का टिकट दिए जाने के बाद 72 घंटों के अंदर चुनाव आयोग को इसकी जानकारी देनी होगी. इसके साथ ही घोषित किए गए उम्मीदवारों की जानकारी स्थानीय अखबरों में भी छपवानी होगी. वहीं राजनीति में बढ़ रहे अपराधिकरण पर सुप्रीम कोर्ट ने चिंता जाहिर की. कोर्ट ने कहा कि पिछले चार आम चुनावों में तेजी से राजनीतिक में अपराधिकरण बढ़ा है.

जानकारी नहीं देने पर हो सकती हैं कार्रवाई

सुप्रीम कोर्ट ने ये फैसला बीजेपी नेता और वकील अश्विनी उपाध्याय की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुनाया है. अश्विनी उपाध्याय ने अपनी याचिका में मांग की थी कि कोर्ट चुनाव आयोग को पार्टियों पर दबाव डालने का निर्देश दे, जिससे राजनीतिक दल ऐसे नेताओं को टिकट ना दें जिन पर आपराधिक केस लंबित है. इस पर फैसला सुनाते हुए SC ने सवाल करते हुए पूछा कि पार्टियों की ऐसी क्या मजबूरी होती है कि वो इन नेताओं को अपना उम्मीदवार बनाती हैं?

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कोर्ट ने कहा कि अगर कोई पार्टी क्रिमिनल बैकग्राउंड वाले व्यक्ति को चुनाव का टिकट देती हैं, तो ऐसे में उनको इसकी वजह भी बतानी होगी. उनको ये बताना होगा कि क्यों उन्होनें बेदाग उम्मीदवारों को चुनाव का टिकट नहीं दिया. साथ ही अगर किसी उम्मीदवार के खिलाफ कोई केस या फिर FIR दर्ज नहीं है, तो ये भी पार्टियों को बताना होगा. अगर किसी उम्मीदवार की जानकारी सोशल मीडिया, वेबसाइट या फिर अखबार में नहीं दी जाती है, तो इस पर चुनाव आयोग कार्रवाई कर सकता है.

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